Tuesday, 21 November 2017

Winter Season Hindi Poem

हर मौसम अच्छा होता है
कुदरत का तोहफा होता है

   तोहफा सस्ता हो या महँगा
   जो भी दे दाता होता है

गर्मी ठन्डे जूस पिलाये
फल सब्जी खूब खीलाये

   हलके फुल्के पहेराहन का
   बच्चा बच्चा लुत्फ़ उठाये

लेकिन कब तक रहेती गर्मी
उसके दिल में भी है नरमी

   बोली हम से जाते जाते
   गोरी बहेना है श्रीमती

श्याम बहेन दिल में मुस्काई
गोरी सर्दी हसती आई

   छुट्टी मिल गयी उकताहट से
   मोटे ऊनी कपडे लेकर आई

मोज़े जूते इज्ज़त पाये
पालिश से चेहरा चमकाये

   टोपी मफलर सदरि लोट
   बच्चो बुढो को गरमाये

खाने की तो बात ना पूछो
क्या क्या खाते यह सोचो

   भाप उडती जब पकवानो से
    मुह में पानी आये देखो

अंडा गोश्त दूध मालई
है सर्दी में सब ले भाई

   पूरी पराठा शीरमाल
   खाकर गाल में सुर्खी आई

आग बड़ी नेअमत भी है
सर्दी की हाजत भी है

   उल्फत की जब आग जलेंगी
   नफरत की फिर दीवार गिरेंगी


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