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Tuesday, 20 November 2018

ठंड फिर से लौट आई है Hindi Poem On Winter Season

आज मैं लेकर आया हु नयी कविता लेकर आया हु Winter Season जिसका टाइटल है. इससे पहले भी बहुत सी कवितायें हम पढ़ चुके है. ठंड पर बहुत सी कविता आप पढ़ चुके होंगे लेकिन उम्मीद है ये कविता आपने नहीं पढ़ी होंगी इसे आखिर तक पढ़े और share भी करे.

सर्दी लौट आई है हिन्दी कविता

winter season hindi poem

सर्दी फिर से लौट आई है
मौसम कितना सरमाई है
मंज़र मंज़र बर्फानी है
गर्मी ने छुट्टी पाई है
थर थर सारे काँप रहे है
जैसे अन्दर से घबराई है
बिस्तर से है नौ दो ग्यारह
गर्मी कैसी हरजाई है
छत पर बर्फ जमी है जैसे
नम आलूदा अंगनाई है
मफलर स्वेटर दस्तानो की
शाम ही से मुंह दिखलाई है
पंखे कूलर बंद पड़े है
ए सी ने फुरसत पाई है
लस्सी शरबत गुम सुम गुम सुम
चाय की फिर बन आई है
एक बस्ता दीवार व दर है
ठंडक फर्श पे उग आई है
रात होते ही घर लौट आओ
हैदर इस में दानाई है

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Winter Season Hindi Poem

Sardi phir se laut aai hai
Mausam kitna sarmaai hai
Manzar manzar brfani hai
Garmi ne chutthi paai hai
Thar thar saare kaanp rahe hai
Jaise andar se ghabrai hai
Bistar se hai nau do gyarah
Garmi kaisi harjaai hai
Chat par baraf jami hai jaise
Nam aaluda angnai hai
Maflar swetter dastano ki
Shaam hi se munh dikhlai hai
Phanke cooler band pade hai
A C ne fursat paai hai
Lassi sharbat gum sum gumsum
Chaai ki phir ban aai hai
Ek basta deewar wa dar hai
Thandak farsh pe ug aai hai
Raat hote hi ghar laut aao
Haidar is me danaai hai

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