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Tuesday, 18 December 2018

सच मूच की गुडिया और माँ Hindi Poem On Baby And Mother

कबूतर का जोड़ा Hindi Kavita पढने के बाद हम सच मच की गुडिया हिन्दी कविता पढने जा रहे है. यह कविता को हम कहानी समझ कर भी पढ़ सकते है बच्चो को इस कविता से moral भी मिलेंगा तो इस कविता को अपने बच्चो के साथ ज़रूर share करे मतलब की उन्हें भी सुनाये.

maa aur beti hindi poem

माँ बेटी की कविता

एक नन्ही मुन्नी गुडिया थी
सच मुच की वो पुडिया थी

था नाम उसका शहजादी
पर काम था उसका बर्बादी

वो घर की चीज़े तोडती थी
कोई चीज़ न अच्छी छोडती थी

अम्मी को मजबूर करती थी
पर दम अब्बू का भरती थी

अम्मी उसको समझती थी
पर दम अब्बू का ही भारती थी

अम्मी उसको समझती थी
तंग आकर हाथ उठाती थी

कोई बात ना उनकी सुनती थी
वो सर को अपने धुनती थी

एक दिन अब्बू ने समझाया
और प्यार से उसको बतलाया

बात अम्मी की गर मनोंगी
अच्छी बेटी बन जाओंगी

फिर प्यार करेंगे सब तुमको
और गुडिया कहेंगे सब तुमको

बात अब्बू ने जो समझाई
कुछ उसके समझ में आई

और बन गई वो अच्छी बच्ची
फिर बन गई गुडिया सच मुच की

हम बात बड़ों की गर माने
और सीधा रास्ता पहचाने

सूख दोनों जहाँ के पाए
और अच्छे बच्चे कहलाए

Hindi Poem - Maa Aur Beti


Ek nanhi munni gudiya tha
Sach much ki wo pudiya thi

Tha naam uska shahzadi
Par kaam tha uska barbadi

Wo ghar ki chize todti thi
Koi cheez na achhi chodti thi

Ammi ko majbur karti thi
Par dam abbu ka bharti thi

Ammi usko samjhati thi
Tang aakar haath uthati thi

Koi baat na unki sunti thi
Apne sar ko wo dhunti thi

Ek din abbu ne samjhaya
Aur pyar se usko batlaya

Baat ammi ki gar manongi
Achhi beti ban jaongi

Phir pyar karenge sab tumko
Aur gudiya kahenge sab tumko

Baat abbu ne jo samjhaai
Kuch baat uske samajh me aai

Aur ban gayi wo achhi bachhi
Phir ban gayi Gudiya sachmuch ki

Ham baat bado ki gar maane
Aur seedha raasta pahchane

Sukh dono jahaan ke paaye
Aur achhe bachhe kahlaaye

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