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Sunday, 30 December 2018

लालची ताजिर का अंजाम Lalach Par Hindi Story

आपने सुना होंगा लालच बुरी बला है आज और हम लालच का अंजाम पढ़ लेते है. इससे पहले बहुत सी कहानियाँ हम पढ़ चुके है लेकिन आज हम जो कहानी पढने जा रहे है उस Story का टाइटल लालची ताजिर है इस कहानी को पढ़ कर आपने कमेंट में बताना है की आपको यह कहानी से क्या सीख मिलती है।

लालची ताजिर Story In Hindi

             किसी गाँव में एक लालची ताजिर रहता था वो बहुत मालदार था लेकिन वो बहुत कंजूस था। एक दिन वो बाजार जा रहा था अपने साथ सौ अशरफिया भी ले जा रहा था। घर से कुछ दूर जाते ही उसकी जेब से अशरफियों की थैली कही गिर गई वो खाली हाथ बाजार पहुच गया। एक दुकान पर जाकर उसने कुछ खरीदी की मगर जैसे ही पैसे देने जेब में हाथ डाला तो जेब खाली पाकर परेशान हो गया और सारे बाजार में तलाश करने लगा लेकिन उसे कही कुछ ना मिला। वो बहुत परेशान होकर घर वापस आगया। घर आकर उसने अपनी बीवी से पुछा बीवी ने कहा : अशरफयों की थैली तुम बाज़ार ले गए थे उसके बाद मुझे पता नही।

      वो तु्रंत बाज़ार गया और ऐलान करवाया की जो मेरी अशरफयों की थैली ढून्ड कर देंगा उसे इनाम में उसे बीस अशरफया दी जाएँगी।

     इत्तेफाक से उन अशरफयों की थैली एक शरीफ आदमी को मिली वो ऐलान सुनकर उस ताजिर के पास आगया। थैली देकर अपना इनाम मांगने लगा।

     मगर ताजिर था कंजूस उसने कहा इस थैली में तो एक सो बीस अशरफियाँ थी तुम ने पहले ही अपना इनाम निकाल लिया है। उसकी बात सुनकर वो शख्स बोला मैंने तो इसे खोल कर भी नहीं देखि लेने की बात तो बहुत दूर !

लालच बुरी बला है हिन्दी कहानी

      इस बात पर दोनों में तू तू मैं मै हो गयी। ये तमाशा देख कर पास के लोगो ने उन्हें काजी ( जज ) के पास पहुंचा दिया। काजी फैसले में बहुत मशहूर था। दोनों ने अपनि अपनी बात सुनाई क़ाज़ी पूरी बात सुनकर उस पास खड़े आदमी से बोला आप इस थैली में बीस अशरफियाँ डाल दो। वो आदमी बीस अशरफी उस थैली में डालने लगा लेकिन बीस अशरफयों की जगह उस थैली में थी ही नहीं। थैली पहले ही पूरी भरी हुयी थी अब काजी ने अपना फैसला सुनाया :

     " ऐ ताजिर तुम झूट बोल रहे हो इस थैली में बीस अशरफयों की जगह है ही नही इसका मतलब ये है की ये थैली तुम्हारी है ही नहीं किसी और की है। तुम सौ अशरफयों वाली थैली इस आदमी को दे दो और एक सो बीस अशरफयों  वाली अपनी थैली कई और जगह तलाश करो।

     ये फैसला सुनकर ताजिर के होश उड़ गए और वो बीस अशरफियाँ देने के बदले पूरी सौ अशरफयों से हाथ धो बैठा। इसी लिये कहते है लालच बुरी बला है।

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