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Tuesday, 7 May 2019

Tehzeeb Haafi Shayari Gazal Ham Ek Umra Isi Gam Me Rahe

Tehzeeb Haafi बहुत कम उम्र में शोहरत पाने वालो में एक है. तहज़ीब हाफी वो शायर है जो हर किसी को अपना दीवाना बना लेता है. जिस किसी ने भी Tehzeeb Haafi Ki Shayari Gazal सुन ली वो हाफी की शायरी का दीवाना होजाता है. तो चलीये हम पढ़ते है तहज़ीब हाफी की ग़ज़ल हम एक उम्र इसी गम में रहे.

tehzeeb haafi hindi shayari


तहजीब हाफी शायरी ग़ज़ल हम एक उम्र 

हम एक उम्र इसी गम में मुब्तला रहे थे
वो सान्हे ही नहीं थे जो पेश आ रहे थे

इसी लिये तो मेरा गाँव दौड़ में हारा
जो भाग सकते थे बेसाखियाँ बना रहे थे

मैं घर से बैठ कर पढता रहा सफर की दुआ
और उनके लीये जो मुझसे दूर जा रहे थे

मैं जानता हु तू उस वक़्त भी नहीं था वहा
ये लोग जब तेरी मौजूदगी मना रहे थे

वो काफ्ला तेरी बस्ती में रात क्या ठहरा
हर एक को अपनी पसंद के ख्वाब आरहे थे

बगैर पूछे ब्याहे गये थे हम दोनों
कुबूल कहते हुये होंठ थरथरा रहे थे

Waseem Barelvi Gazal

Haamid Bhusawali Gazal Ham Ek Umra Isi Gam

Ham ek umra isi gam me mubtala rahe they
Wo sanehe hi nahi they jo pesh aarahe they

Isiliye to mera gaanv daud me haara
Jo bhaag sakte they besaakhiyan bana rahe they

Main ghar me baithkar padhta raha safar ki duaa
Aur unke liye jo mujhse door ja rahe they

Main janta hu tu us waqt bhi nahi tha waha
Ye log jab teri maujudgi mana rahe they

Wo Qafla teri basti me raat kya thahra
Har ek ko apne pasand ke khwaab aa rahe they

Bagair puche byahe gaye they ham dono
Qubool kahte huye honth tharthara rahe they

दोस्तों आपको तहज़ीब हाफी की ग़ज़ल पसंद आई या नही comment में बताये और अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूले.

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