Tuesday, 14 August 2018

बादशाह के दरबार की कहानी हसद की आग Hindi Story

कौव्वे की Hindi Story मुझे लगता है आप नही भूले होंगे भूलना भी नही चाहिए थी ही वो Interesting Hindi Story आज हम इस कहानी के माध्यम से Acidity जलन का अंजाम पढेंगे. इस Hindi Story में Acidity का दूसरा जानेंगे. आखिर तक इस कहानी को पढ़े बहुत मजेदार कहानी है.

हसद की आग Hindi Story

           बहुत पुरानी बात है बादशाह के दरबार में एक मछेरा मछली लेकर आया मछली का वजन 4 किलो के करीब था। बादशाह ने मछेरे को चार हज़ार दिरहम देने का हुक्म दिया। बादशाह के नौकर को ये देखकर जलन होगई और उससे रहा नही गया कहने लगा : बादशाह सलामत आप इस मछली के बदले चार हज़ार दीरहम दे रहे है ? फिर कहा आप उसे बुलाइये मैं उससे सवाल करना चाहता हु।



         मछेरे को बादशाह ने बुलवाया नौकर ने पुचा : ये मछली नर है या मादा? शायद उसका मकसद था यह नर कहेंगा तो मैं मादा मछली के फायदे बताऊंगा और मादा कहेंगा तो नर के। लेकिन मछेरा बड़ा चालाक था उसने कहा ये नर ना मादा यह तो दोनों के बीच की मछली है और इसके बहुत फायदे है। बादशाह ने कहा इसे और चार हजार दिरहम दिए जाये मछेरा ख़ुशी में मस्त था और नौकर जलन की आग में जल रहा था।

            मछेरा जैसे ही जाने लगा उसके हाथ से एक दिरहम गिर गया उसे उठाने के लीये वह झुका यह बादशाह के दरबार के खिलाफ था तो नौकर को एक और चांस मिल गया नौकर ने जल्दी से कहा बादशाह सलामत यह आदमी कितना घटिया है आपने इसे इतना इनाम दिया फिर भी ये एक दिरहम के लिए बे अदबी पर उतर आया।



                        बादशाह ने मछेरे को बुलाया और कहा तूने ये घटिया हरकत क्यों की ! मछेरे ने कहा बादशाह सलामत मुझे अच्छा नहीं लगा आपकी तस्वीर जमीन पर पढ़ी रहे इसलिए मैंने इसे उठाकर जेब में रख लिया। बादशाह ने हुक्म जारी किया इसे और चार हजार दिरहम दीये जाये। दूसरी तरफ नौकर का हाल जलन से बुरा था और अपने दांत पीसते रह गया। मछेरे ने कहा तुम अपनी आग में जलते रहो जब तक अपने दिल में जलन रखोंगे चैन से नही रहोंगे।

उम्मीद है दोस्तों आपको यह कहानी बहुत पसंद आई होंगी तो Share करना ना भूले.


Thursday, 9 August 2018

कर बुरा हो बुरा ! कौव्वे की कहानी Best Hindi Story

Modern Crow की Story पिछली पोस्ट में हमने पढ़ी थी आज हम बुराई का अंजाम इस शीर्षक पर Hindi Story पढेंगे. आपको यह कहानी पढने में बहुत मज़ा आयेंगा क्युकी यह Story सिर्फ कहानी ही नहीं बल्कि Best Funny Story है.
              इस कहानी में हम एक कौव्वा और चिड़िया के बारे में पढेंगे किस तरह चिड़िया अपनी बुद्धि से अपने बच्चो की जान बचाती है.

बुराई का अंजाम बुरा Best Hindi Story

         एक पेड़ पर चिड़िया उसके बच्चो के साथ रहती थी उन बच्चो पर एक कौव्वे की नज़र थी मौका मिले और वह बच्चो लो लहा जाये लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो कौव्वे से रहा नहीं गयाएक दिन कौव्वा चिड़िया के घोंसले पास जाकर बैठ गया. चिड़िया डर गयी और पूछा कौव्वे भाई आप क्यों आये हो ? कौव्वा बोला : चिड़िया बी मैं तुम्हारे बच्चो को खाने आया हु !
         चिड़िया सुनकर बहुत डरी फिर बोली " पहले आप अपनी चोंच धोकर आइये देखते नहीं कितनी ख़राब हो गयी है !
                ये सुनकर कौव्वा ख़ुशी ख़ुशी नदी के पास गया और नदी से कहने लगा : "नदी नदी तुम नदी दास , मैं काकदास , दो पनला , धोऊ चोंचला , खाऊ चिड़ि का चेंगला , मटकाऊ कल्ला.

        नदी कहने लगी पहले कोई बर्तन लाओ उसमे पानी लेकर फिर चोंच को धोना.
                 कौव्वा बर्तन लेने कुम्हार के पास गया और कहने लगा : कुम्हार कुम्हार ! तुम कुम्हारदास , मैं काकदास , दो घडला , भारू पनला , धोऊ चोंचला , खाऊ चिडीला , मटकाऊ कल्ला.

            कुम्हार कहने लगा : कौव्वे मिय्या मेरे मिटटी ख़तम हो गयी है मिटटी ला दो मैं घड़ा बना दूंगा.
                   कौव्वा ये सुनकर मिटटी के पास और कहने लगा : मिटटी मिटटी तुम मिटटीदास , मैं काकदास , दो मटला , बने मटकला , भरू पनला , धोऊ चोंचला , खाऊ चिड़ि का चेंगला , मटकाऊ कल्ला.

      मिटटी कहने लगी तुम कोई चीज़ लाओ मुझे खोदने के लिये फिर ले जाना.

        अब कौव्वा हिरन के पास गया और कहा : हिरन हिरन ! तुम हिरन दास , मैं काक दास , दो सिंगला , खोदे मटला , बने मटकला , भरू पनला , धोऊ चोंचला , खाऊ चिड़ि का चेंगला , मटकाऊ कल्ला.

     हिरन कहने लगा तुम किसी ताक़तवर कुत्ते को बुलाओ वो मुझसे लड़ेंग तो मेरा सींग तुटेंगा फिर तुम उसे ले जाना.

       ये सुनकर कौव्वा कुत्ते के पास गया : कुत्ते कुत्ते तुम कुत्ते दास , मैं काकदास , लडू हिरला , टूटे सिंघला , खुदे मटला , बने मटकला , भरू पनला , धोऊ चोंचला , खाऊ चिड़ि का चेंगला , मटकाऊ कल्ला.

          कुत्ते ने कहा मेरे लिए दुध ले कर आओ फिर मैं लडूंगा.

                कुत्ते की बात सुनकर कौव्वा गाय के पास गया और कहने लगा : गाय गाय तुम गाय दास , मैं काक दास , दो दूधला , पिये कुतला , लड़े हिरला , टूटे सिंगला , खुदे मटला , बने मटकला , भरू पनला , धोऊ चोंचला , खाऊ चिड़ि का चेंगला , मटकाऊ कल्ला.

   गाय कहने लगी तुम मेर लिए घास ले आओ दुध ले जाओ.

         अब कौव्वा लालच के मारे घास के पास गया कहने लगा : घास घास तुम घास दास मैं काकदास , दो घासला , खाये गायला , दे दूधला , पिये कुतला , लादे हिरला , टूटे सिंगला , खुदे मटला , भरू पनला , धोऊ चोंचला , खाऊ चिड़ि का चेंगला , मटकाऊ कल्ला.

      घास कहने लगी कौवे भाई तुम एक खुरपी लाओ और मुझे खोद कर ले जाओ.

          कौव्वा लुहार के पास गया और कहने लगा : लुहार लुहार ! तुम लुहार दास , मैं काकदास , डो खुरपला , खोदे घासला , खाये गायेला , दे दूधला , पिये कुतला , लड़े हिरला , टूटे सिंगला , खुदे मटला , भरू पनला , धोऊ चोंचला , खाऊ चिड़ि का चेंगला , मटकाऊ कल्ला.

            लुहार कहने लगा कौव्वे मिया मैं जल्दी में हु तुम थोड़ी देर से आकर ले जाना. कौव्वा जैसे ही आया तो लुहार की बीवी ने उसे देख लिया कौव्वा उसे बहुत परेशान करता था कभी रोटी ले जाता तो कभी कुछ ! जब कौव्वा खुरपी लेने आया तो लुहरन कहने लगी तुम इसे ले कैसे जाओंगे तो उसने कहा मैं इसे अपने परो पर ले जाऊंगा लुहारन ने गरम खुरपी कौव्वे के परो पर रख दी और कौव्वा वही जल गया.

        देखा आपने लालच का अंजाम ! कौव्वे को उसके किये की और लालच की सजा मिल गयी और चिड़िया के बच्चो की जान बच गयी.

Thursday, 2 August 2018

आधुनिक कौआ - Modern Crow Real Hindi Story

आपने प्यासे कौवे की Story सुनी होंगी  या पढ़ी होंगी आज हम Modern कौवे की कहानी पढेंगे यह कहानी आपको ज़रुर बहुत पसंद आएँगी और उम्मीद है आप इसे अपने बच्चो को भी सुनायेंगे.

Modern Kauwa Real Hindi Story

कुछ दिन पहले की बात है एक बच्चा मुझे प्यासे कौवे की कहानि सुनाने लगा जो स्कूल से उसी दिन सुन कर आया था. मैंने उससे कहा Science के Rules से ऐसा नहीं होता उसमे कौवे की बुद्धिमत्ता बताने के लिए Story बनायी गयी है. अगर ऐसा होता तो लोग कुंवे से रस्सी डाल कर पानी नहीं निकालते मेरी बात सुनकर वह नाराज हो गया क्यूंकि बच्चो के दिमाग में टीचर की बात का बहुत असर होता है. उसको खुश करने के लिए मैंने उससे कहा एक Practical करले वो तैयार हो गया. उसके साथ उसके दोस्त भी ले आया. 

                 मैंने एक कांच के Glass में पानी भरा और बच्चो से पत्थर लाने को कहा ग्लास को थोडा खाली रखा और उसमे कंकर (पत्थर) डाले पहले पानी ऊपर आया और पानी का रंग बदलता दिखाई दिया कुछ ही देर में पानी और कम होगया पत्थर से ग्लास भर गया. मैंने उनसे कहा मैं तुम्हे Modern कौवे की कहानि सुनाता हु बच्चे खामोश बैठ  मैंने कहानी शुरू की 

प्यासा कौवा Funny Hindi Story


       " एक कौवा था वही काला कलोटा मगर नए ज़माने का था वो शहर की पोश कॉलोनी में पेड़ पर रहता था.  उस कॉलोनी में रह कर वो भी सफाई पसंद हो गया था एक दिन गर्मी के दिनों में उसे प्यास लगी वो पानी की तलाश में बहुत घूम रहा था लेकिन उसे साफ पानी नहीं मिल रहा था आखिर एक पार्क में उसे एक घड़ा नज़र आया वो घड़े के पास पहुंचा उसमे पानी कम था उसे अपने पुरखो की कहानी याद आयी लेकिन तरीका पसंद नहीं आया उसने सोचा अगर यह पत्थर इसमें डालूँगा तो पानी गन्दा हो जायेंगा. उसे एक नयी सूझी कॉलोनी में लोग कोल्ड्रिंक्स पीते है वह पाइप लेने के लिये उदा और कोल्ड्रिंक्स की दूकान में थैली में लगी पाइप ले आया. पाइप घड़े में डाला और धीरे धीरे पानी सिप करने लगा. उसने प्यास बुझाने के साथ साथ पानी का मजा भी लिया और उड़ गया ."

      बच्चो को science का Rule और Thirsty Crow की  कहानी का नया रूप बेहद पसंद आया ख़ुशी से तालियाँ बजाने लगे. उम्मीद है आपको भी कहानी बहुत पसंद आई होंगी लेकिन आपको तालियाँ नहीं बजानी इसे Social Media पर Share करना है.

Wednesday, 25 July 2018

सफ़ेद खरगोश रंग भेद का अंजाम Hindi Story With Moral

Funny True Hindi Story इससे पहले हमने पढ़ी थी. आज हम रंग भेद पर Story पढेंगे. इस कहानी में Apartheid का अंजाम बताया गया है. उम्मीद है आपको यह कहानी बहुत पसंद आएँगी.

Hindi Story On Apartheid With Moral

             किसी जंगल में खरगोश का जोड़ा अपने दो बच्चो के साथ रहता था एक बच्चे का रंग सफ़ेद दुसरे का काला था। सफ़ेद खरगोश अपने भाई के काले रंग का मजाक उडाया करता था । उसका भाई यह सुनकर उदास हो जाता उसकी माँ बच्चे को समझती के ऐसा नहीं कहना चाहीये। लेकिन सफ़ेद खरगोश यह बात एक कान से सुनता और दुसरे कान से निकाल देता।



             दिन गुज़रते गये सफ़ेद खरगोश में कोई फर्क नहीं आया। एक दिन जंगल में शिकारी आया उस वक़्त दोनों खरगोश खेल रहे थे जब शिकारी ने सफ़ेद खरगोश को देखा तो उसे वह बहुत प्यारा लगा। शिकारी ने काले खरगोश पर कोई ध्यान नहीं दिया। शिकारी सफ़ेद खरगोश को पिंजरे में कैद कर ले गया।



           अब सफ़ेद खरगोश सारा दिन पिंजरे में कैद रहता और शिकारी का बेटा उसके साथ खेलता लेकिन यहाँ पर सफ़ेद खरगोश को मज़ा नहीं आता। उसे अपने माँ बाप भाई की बहुत याद आती। वोह अक्सर सोचता रहता काश मैं भी काले रंग का होता तो यूँ आज कैद में ना होता बल्कि अपने घर वालो के साथ होता।

Moral : आप कहानी पढ़ कर ही Moral समझ गये होंगे की हमें अपने रंग पर गुरुर नहीं करना चाहिए वरना उसका अंजाम ऐसा भी हो सकता है।


Wednesday, 18 July 2018

धीरज का फल मीठा क्यों नहीं FunnyTrue Hindi Story

इससे पहले हमने Waseem Barelvi Sahab Ki Shayari पढ़ी थी. आज हम Funny True Story Hindi में पढेंगे. यह Funny Story पढ़कर आपको ज़रुरु पसंद आयेंगी किस तरह से एक लड़के ने Story को नया मोड़ दिया है. तो शुरू करते है उम्मीद है आपको यह कहानी बहुत पसंद आएँगी.यह Story बिहार का लड़का खुद लिखता है और कहानी का रोल भी उसी का है.

धीरज का फल Funny True Story

मैंने कही पढ़ा था धीरज का फल मीठा होता है. एक दिन मुझे भूक लगी थी और मम्मी ने करीले (Bitter Gourd) का सालन पकाया था. मैंने बहुत सबर (धैर्य) करने के बाद करीले खाए फिर भी करीले कडवे ही निकले. एक दिन अब्बू आम लाये अम्मी ने ठंडा करने के लिए आमो को कांट कर फ्रीज में रख दिये मै बहुत देर सबर करके आम खाने गया तो देखा आम फ्रिज में नहीं है किचन पर एक प्लेट में छिलके और गुठलियाँ पड़ी थी मैंने छिलके चबाये तो वो कडवे निकले. मैंने सोचा शायद गुठलियाँ मीठी होंगी मगर उस में भी कुछ मीठा न निकला उसके बाद मैंने बहुत सोचा के ऐसा क्यों हो रहा है ? दिमाग में एक बात आई के सबर का फल नहीं बल्कि महेनत का फल मीठा होता है.

           बाजी का कहना था के करेले का जूस पीने से खून साफ़ होता है मैंने बहुत महेनत से मिक्सी में करीले का जूस बनाया और आधा घंटा सबर भी किया मगर फिर भी वोह कड़वा ही निकला. न सबर का फल मीठा निकला और न ही महेनत का !
क्या आप बता सकते है ऐसा क्यों हुआ ?

Note : अगर आपके पास इसका जवाब है तो जरुर हमें comment करके बताये और share करना न भूले.

Sunday, 8 July 2018

Waseem Barelvi Shayari In Hindi

Waseem Barelvi नाम हमारे लिए नया नहीं है इससे पहले भी हमने Waseem Barelvi Ki Shayari हम पढ़ चुके है आज फिर नयी Shayari लेकर हम आये जो आपको बहुत पसंद आएँगी.

Waseem Barelvi Hindi Shayari

अपने आपको हम एक मसअला बना न सके
इसीलिए तो किसी की नज़र में आ न सके

आंसुओ की तरह हम वास्ते निभा न सके
जिन आँखों में रहे उनमे ही घर बना न सके

वहा आँधियों ने सिखा दिया सफ़र का हुनर
जहा चराग हमें रास्ता दिखा न सके

जो पेश पेश थे बस्ती बचने वालो में
लगी जब आग तो अपना ही घर बचा न सके

मेरे खुदा ऐसी जगह पर उसे रखना
जहा कोई मेरे बारे में कुछ बता न सके

तमाम उम्र की कोशिश का यही हासिल
किसी को अपने मुताबिक कोई बना न सके

Hindi Shayari ByWaseem Barelvi


Apne aapko ham ek mas'ala bana na sake
Isiliye to kisi ki nazar me aa na sake

Aansuon ki tarah ham waste nibha na sake
Jin aankho me rahe unme hi ghar bana na sake

Waha aandhiyon ne sikha diya safar ka hunar
Jaha Charag hame rasta dikha na sake

Jo pesh pesh they basti bachane walo me
Lagi jab aag to apna hi ghar bacha na sake

Mere khuda aisi jagah par use rakhna
Jaha koi mere bare me kuch bata na sake

Tamam umra ki koshish ka yahi hasil
Kisi ko apne mutabiq koi bana na sake

Thursday, 21 June 2018

Why Are Obesity Best Poem In Hindi

Flowers Poem In Hindi इससे पहले हमने पढ़ी थी आज हम मोटापे पर Poem पढेंगे जिसमे मोटापे का Solution भी बताया गया है किस तरह से एक बच्ची अपनी माँ से मोटापे की शिकायत कर रही है और माँ उसे मोटापे का Solution दे रही है उम्मीद है आपको यह Poem बहुत पसंद आएँगी.

मोटापा क्यों है 

माँ मैं इतनी छोटी क्यों हु
और फिर इतनी मोटी क्यों हु

   देख के मुझको सब हँसते है
   भले बुरे सब ये कहते है

बस दिन भर ये खाना खाये
दुबली कैसे फिर ये रह पाये

   माँ बोली जो ये मोटापन है
   गलत तरह का रहन सहन है

खाना वक़्त पे जो भी खाए
और लुकमा भी खूब चबाये

   बने अगर वो शाकाहारी
   खाए रोटी और तरकारी

बाजारी जो चीज़ है सारी
लगे भली ये प्यारी प्यारी

   लेकिन लाती है ये बिमारी
   होजाता है जिस्म भी भारी

खाओ जितना मौसमी फल हो
आम, अंगूर या एप्पल हो

   खाने में मत पियो पानी
   ज़रा सी कम करलो बिरयानी

फिर मोटी न कहलाओंगी
अपना फिटनेस रख पाओंगी

Why Are Obesity

Maa main itni choti kyu hu
Aur phir itni moti kyu hu

   Dekh ke mujhko sab hanste hai
   Bhale bure sab ye kahte hai

Bas din bhar ye khana khaye
Dubli kaise phir rah paaye

   Maa boli jo mota pan hai
   Galat tarah ka rahan sahan hai

Khana waqt pe jo bhi khaye
Aur luqma bhi khub chabaye

   Bane agar wo Shakahari
   Khaye roti aur tarkari

Bazari jo cheez hai sari
Lage bhali ye pyari pyari

   Lekin laati hai jab bimari
   Hojata hai jism bhi bhaari

Khao jitne mausami Phal ho
Aam , Angoor aur Apple ho

   Khane me mat piyo paani
   Zara si karlo kam biryani

Phir moti na kahlaongi
Apna Fitness rakh paongi

Popular Posts

Recent Posts

Follow by Email